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December 2, 2022 9:11 pm

Categories :- (श्रेणियाँ)

blogalien.com को हमने विशेष रुप से तैयार किया हैं। आप जिस श्रेणी के बारे में पढ़ना चाहते हो, तो आप उसी श्रेणी के ऊपर टच करें आप सीधे उस पेज पर पहुंच जाएंगे ।

शिक्षा :-

शिक्षा ज्ञान, उचित आचरण, तकनीकी दक्षता, विद्या आदि को प्राप्त करने की प्रक्रिया को कहते हैं। एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण के प्रयास को शिक्षा कहते हैं।  

इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है, जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है । तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। हमारा भी शिक्षा के इस ब्लॉग कि श्रेणी में यही प्रयास रहेगा।

रोचक तथ्य :-

तथ्य को सुनकर लोगो को किसी ज्ञान को जानने की अधिक इच्छा उत्पन्न होती है। यह एक ज्ञान को अलग प्रकार से समझाने का स्त्रोत है। तथ्य एक प्रकार का उत्सुकता से ज्ञान को समझने वाला शब्द है। तथ्य (fact) ऐसा कथन होता है, जो वास्तविकता के अनुकूल हो या जिसे साक्ष्य के प्रयोग द्वारा साबित किया जा सके।  

तथ्य की सच्चाई को परखने के लिए उसके प्रमाण प्रस्तुत करे जाते हैं । जिनके लिए मान्य सन्दर्भों व स्रोतों का प्रयोग करा जाता है। वैज्ञानिक तथ्यों को ऐसे निरीक्षणों और मापन से प्रमाणित करा जाता है। जिनकों ज्ञात प्रक्रियाओं द्वारा दोहराकर बार-बार भिन्न लोगों द्वारा परखा जा सके।

मनुष्य, पशु, पक्षी, जीव-जंतु, जलचर, खगोलीय आदि कुछ ऐसे रोचक तथ्य है, जिनके बारे में हमको जानना आवश्यक चाहिए । ऐसी ही रोचक जानकारी की बातों के बारे में हम रोचक तथ्य कि इस श्रेणी में बताने का प्रयास करेंगे । जो आपके सामान्य ज्ञान में और भी वृद्धि करेगी ।

रत्न-उपरत्न :-

रत्न प्रकृति प्रदत्त एक मूल्यवान निधि है। मनुष्य अनादिकाल से ही रत्नों की तरफ आकर्षित रहा है, वर्तमान में भी है, तथा भविष्य में भी रहेगा। रत्न सुवासित, चित्ताकर्षक, चिरस्थायीव दुर्लभ होने तथा अपने अद्भुत प्रभाव के कारण भी मनुष्य को अपने मोहपाश में बाँधे हुए हैं।

रत्न आभूषणों के रूप में शरीर की शोभा तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव के कारण रोगों का निवारण भी करते हैं। रत्नों में चिरस्थायित्व का ऐसा गुण है कि ये ऋतुओं के परिवर्तन के कारण तथा समय-समय पर प्रकृति के भीषण उथल-पुथल से तहस-नहस होने के कारण भी प्रभावित नहीं होते।

ऐसी ही बातों के बारे में हम रत्न-उपरत्न कि इस श्रेणी में बताने का प्रयास करेंगे । जो आपके सामान्य ज्ञान में और भी वृद्धि करेगी ।

आरती संग्रह :-

आरती हिन्दू उपासना की एक विधि है। इसमें जलती हुई लौ या इसके समान कुछ खास वस्तुओं से आराध्य के सामाने एक विशेष विधि से घुमाई जाती है। ये लौ घी या तेल के दीये या कपूर की हो सकती है। इसमें वैकल्पिक रूप से, घी, धूप तथा सुगंधित पदार्थों को भी मिलाया जाता है।

सामान्यतः पूजा के अंत में आराध्य भगवान की आरती करते हैं। आरती में कई सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है। इन सबका विशेष अर्थ होता है। ऐसी मान्यता है कि न केवल आरती करने, बल्कि इसमें सम्मिलित होने पर भी बहुत पुण्य मिलता है।

कई बार इसके साथ संगीत (भजन) तथा नृत्य भी होता है। मंदिरों में इसे प्रातः, सांय एवं रात्रि (शयन) में द्वार के बंद होने से पहले किया जाता है। आरती संग्रह कि इस श्रेणी में सनातन धर्म के सभी देवी देवताओं की हिंदी में लिखित आरती लिखने का प्रयास करेंगे

चालीसा संग्रह :-

चालीसा संग्रह कि इस श्रेणी में सनातन धर्म के सभी देवी देवताओं की हिंदी में लिखित चालीसा लिखने का प्रयास करेंगे

त्यौहार :-

त्यौहार उमंग और  उत्सव से उल्लास और उन्नति होती है…उत्सव कोई भी हो यह उल्लास का क्षण है। 

धर्म-कर्म :-

धार्मिक प्रसंग :-

स्वास्थ्य  :-

आयुर्वेद औषधि :-

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